गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

!! आम आदमी !!


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'आम' आदमी,
'आम' ही रहा
कभी 'ख़ास' नहीं हुआ !
'ख़ास' आदमी के लिए 
ज़रूरी है 
'आम' आदमी का 
'आम' बने रहना !!
एक ऐसा 'आम'
जिसे 'ख़ास' आदमी 
पूरा का पूरा 
चूस सके 
अपनी 'खासियत'
बचाने के लए...!
'आम' आदमी
बना ही है बेचारा
चुसे जाने के लिए.....!!
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!! ख़बरदार !!

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ख़बरदार...!!
चुप रहना....!!!
'चोरों-बेईमानो' को
'चोर-बेईमान' मत कहना....!!!
'वे' आयेंगे.....!
गिडगिडाएंगे ...!!
'वोट' ले जायेंगे...!!!
'कुर्सी' से चिपक जायेंगे....!!!!
देश का धन लूट खायेंगे....!!!!!
कुल मिला कर
भ्रष्टाचार के
तमाम रिकार्ड तोड़ डालेंगे,
और
अवाम की किस्मत फोड़ डालेंगे....!!!!!!
लेकिन
ख़बरदार...!!
तुम कुछ ना कहना,
चुप रहना....!!!
'चोरों-बेईमानो' को
'चोर-बेईमान' मत कहना....!!
'वे'
ठोंक कर सीना
राज करेंगे.......!
'घर' की तिजोरी
और
'स्विस' के 'खाते' भरेंगे.....!!
'२ जी-३ जी' में पेट भर खायेंगे.......!!!
जानवरों का
'चारा' तक 'चर' जायेंगे.......!!!!
'पांच सालों' में
अपनी 'दस पीढ़ियों' का
'भला' कर जायेंगे........!!!!!
लेकिन
ख़बरदार...!!
तुम सबकुछ सहना,
चुप रहना....!!!
'चोरों-बेईमानो' को
'चोर-बेईमान' मत कहना....!!
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बुधवार, 28 दिसंबर 2011

!!राक्षस !!

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भगवान् का दूसरा रूप कहे जाने वाले डाक्टर,राजस्थान में पिछले 7 दिनों से हड़ताल पर है.
डाक्टरों के हड़ताल पर जाने से 60 से ऊपर मरीज इलाज़ के अभाव में बेमौत मारे जा चुके हैं !
भरपूर वेतन,और अनेकानेक सुविधाएं सरकार से पाने वाले डाक्टरों की हड़ताल का कारण,कम वेतन को बताया जा रहा है !
भगवान् का दुसरा रूप कहे जाने वाले डाक्टरों का,मात्र 'धन' के लिए यूँ 'राक्षस' बन जाना क्या ठीक है ?
थोड़े दिनों बाद कुछ डाक्टर झुकेंगे,कुछ सरकार झुकेगी और हड़ताल टूट जायेगी,लेकिन उन मरीजों का क्या जो असयम इलाज़ के अभाव में काल के गाल में समा गये !?
किसी का बेटा,बेटी,बहू,पति,पत्नी,माँ,पिता.....जो इन गैर ज़िम्मेदार डाक्टरों और सरकार की वजह से अपने परिवार को छोड़ गए-उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा??
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गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

!! रात !!

*** रात ***
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'रात', 

रात-रात भर

जागती है,  

 इंतज़ार में 'चाँद' के !
'रात' वफ़ा की मिसाल है !
चाँद आता नहीं 
हर रोज !
'चाँद'  
आता है 
कभी-कभार,
कभी जल्दी,
कभी देर से !
और कभी 
आता ही नहीं !
'रात', 
फिर भी करती है 
हर रात 
शिद्दत से इंतज़ार 
'चाँद' का !!
'चाँद' बे-वफ़ा है,
फिर भी कम नहीं होती 
वफ़ा 'रात' की !
'रात', 
रात-रात भर जागती है 
इंतज़ार में चाँद के !
लेकिन, 
चाँद जब नहीं आता
तो रोती है जार-जार 
'रात',
रात भर !!
लेकिन हम 
देख नहीं पाते 
आंसू 'रात' के !
क्योंकि 
हम देख नहीं सकते
'रात' को  
रात में.
लेकिन हाँ,
हम महशूस    
कर सकते हैं 
रोती हुयी 'रात' को,
उस रात, 
जब चाँद नहीं आता.
रोती हुयी 'रात' 
अपनी ऑंखें 
करती है नम 
और 
चाँद के ना आने से 
हो जाती है 
ग़म में और काली. 
लेकिन 
बे-वफ़ा नहीं होती 
'रात'......!!
'रात' हर रोज आती है 
इंतज़ार में चाँद के......
चाँद चाहे आये ना आये....!
रात बे-वफ़ा नहीं होती !!!

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शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

!! एक दिन !!

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एक दिन
तुम मिले थे
यूँही
किसी 'मोड़' पर, और तब
लगा था यूँ
कि
जिंदगी को शायद
अब
मिल गया है
एक खुबसूरत 'मोड़' !
लेकिन
अफ़सोस !
हालातो ने
मुझे
ऐसा 'मोड़ा'
कि
मैं
'मुड़ते-मुड़ते'
टूट ही गया !!
सही है !!!
जिस 'मोड़' पर
तुम मिले थे,
उसी 'मोड़' पर
मैं
पढ़ना भूल गया था
कि
'मोड़' पर
संभल कर चलें,
यहाँ
दुर्घटनाएं भी
होती है !!!!

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शनिवार, 5 नवंबर 2011

!! मुझे गर्व है तुम पर !!


बिटिया इन दिनों विदेश में है.वहां पिछले दिनों बर्फीला तूफ़ान आया...
उसी की कुछ तस्वीरें,मेरी बिटिया द्वारा ली गयी,जिसे मैं साझा कर 
 रहा हूँ.....अपनी भावनाओं के साथ....!

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बेटी,
तुम हो
सात समंदर पार
एक अनदेखी-अनजानी सी
जगह पर,
अजनबियों के बीच
बिलकुल नए माहोल में.
मुझे गर्व है
तुम पर
कि
तुमने
हिम्मत दिखाई
और कुछ सीखने का
ज़ज्बा लेकर
चली गयी
सात समंदर पार !
घर पर
जब तुम खाती थी
बर्फ का गोला भी
तो मैं
रोक देता था तुम्हें
यह कह कर
कि
सर्दी लग जायेगी,
ज़ुकाम हो जाएगा......
अब
सात समंदर पार तुम
बैठी हो
बर्फ से घिरी हुयी,
बर्फ के बीच में
तब भी मैं
बैखोफ हूँ
कि
मेरी बेटी में है
हिम्मत-साहस
और ज़ज्बा
कुछ सीखने का,
कुछ कर गुजरने का......
हर विपरीत परोस्थिति से
लड़ने का.......
हर हाल में
आगे ही आगे
बढ़ने का........
बेटी
मुझे गर्व है
तुम पर. 
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

!! पते की बात !!

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---------------------------------- पते की बात -----------------------------
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समय बड़ा खराब है ! इस समय 'पते की बात' करना,खतरे से खाली नहीं है ! अच्छों-अच्छों के 'पते',लापता हो रहे हैं ! भारी-भरकम 'पते' वाले कईं कर्णधार किसी डाल से टूटे सूखे 'पत्ते' की तरह जा कर सीधे 'तिहाड़' में गिर गए,तो कुछ का 'पत्ता' कटते-कटते रह गया ! कुल मिला कर इस वक़्त 'पते की बात' करना ही फ़िज़ूल सा लगता है !
आखिर किसे 'पता' था कि 'अन्ना' नाम कि कोई आंधी आएगी और कईयों के 'पत्ते' काट जायेगी ! दिल्ली में सत्ता के 'पते' पर बैठे कईयों के 'पते' कब बदल जायेंगे,क्या कोई कह सकता है ! केंद्र के चुनाव अभी दूर है,लेकिन कईं  कुर्सी भक्तों को अपने लापता होने का अभी से 'पता' चल गया है ! वे इस बात का 'पता' करने में जुटे हैं,कि आखिर हमारा 'पत्ता' काटने वाले का असली 'पता' क्या है ! अगर उन्हें उसका असली 'पता' मिल जाए,तो वे बस एकजुट हो कर उसी का 'पत्ता' साफ़ करने में लग कर सत्ता के बचे-खुचे दिनों को सार्थक कर दें ! अब ऐसी स्थिति में आप ही सोचिये 'पते की बात' कैसे की जाय !
.वैसे भी सत्ता में बैठ कर माल-पुए खाते-खाते कब पांच साल निकल जाते हैं,'पता' ही नहीं चलता ! 'पता' चलता है तो बस इतना कि इन पांच सालों में जो 'लापता' या 'बे-पता' थे,उनका 'पता' राजधानी के बंगलों पर चस्पा हो गया है ! ये अलग बात है कि राजधानी में एक अदद 'पता' रखने वाले भी अपने मोहल्ले,गाँव या शहर में तो 'लापता' ही रहते हैं ! अब ऐसे में 'पते की बात' करना कोई बहुत समझदारी वाला काम नहीं हो सकता !
सच कहूँ तो मुझे कच्चा-पक्का 'पता' ज़रूर चला है कि अगली बार अवाम, राजधानी के बंगलों का 'पता' देने वाले मोहल्ले,गाँव और शहरों के 'पते' वाले,'लापता' लोगों को अपने असली 'पते' पर लाने की ठान चुका हैं ! अब विश्वसनीय तौर पर तो मुझे भी 'पता' नहीं कि दिल्ली में या यूँ कहें कि राजधानी में कितनों के 'पते' बदल जायेंगे,या 'पत्ते' कट जायेंगे,लेकिन इतना अवश्य है कि अवाम को जो 'पता' चला है,वो कईयों को 'लापता' या 'बे-पता' ज़रूर करेगा.अब ऐसे में आखिर 'पते की बात' करके भी क्या फायदा ! 
वैसे मेरा 'पता' यही रहेगा,आप जब चाहें यहाँ तशरीफ़ ला सकते हैं.
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शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

!! कमाल है !!



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कमाल है !
हज़ारों
सवाल है !!
ज़वाब है गिनती के 
और
हाल बेहाल है !!!
कमाल है !
महंगाई ने
कर दिया है
छिन्न-भिन्न,
रोटी के सामने
लग गया है
प्रश्न चिन्ह !
थाली से गायब 
अरसे से ही 
सब्जी-दाल है,
कमाल है !
कैसा दूध !?
कैसी चाय !?
कॉफी ने भी
कह दिया बाय !
घी-तेल पर 
पहले से ही
मचा बवाल है,
कमाल है !
कनिमोड़ी-कलमाड़ी 
कलयुगी राजा,
देश का खूब
बजाया बाजा !
'मनमोहन' के
मंत्री-संत्री
मचा रहे
धमाल है,
कमाल है !
मेहनतकश,
हरामखोरों से
थक गया है,
गरीब का पेट
भूख से
पिचक गया है !
'कुर्सी' पर विराजित
सफेदपोशों के
टमाटर जैसे
लाल गाल है,
कमाल है !
खरगोश-बकरी
मर रहे हैं,
बिच्छू-सांप
राज कर रहे हैं !
भेड़ियों के तन पे
भेड़ की खाल है,
कमाल है !
हज़ारों
सवाल है !!
ज़वाब है गिनती के 
और
हाल बेहाल है !!!
कमाल है !
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