शनिवार, 9 मार्च 2013

!! गुंडों की 'पोषक' व्यवस्था !!

.....'गुंडे' सिंहासनों की ओट में बेख़ौफ़ है.....कर्तव्यपरायण-देश भक्त लोग गुंडों के हाथों मारे जा रहे हैं.....सत्ता के सिंहासन पर बैठे 'दोगले' लोग, मार डाले गए देश भक्तों और कर्तव्यपरायण लोगों को चंद लाख रुपयों के चेक तथा तमगे दे कर मामले को ख़त्म करने की परम्परा निभा रहे है.....'गुंडे' फिर-फिर अपने कारनामें दोहराने लगते है......'सरकार' फिर-फिर चेक और तमगे बांटती है.....गुंडों की यह 'पोषक' व्यवस्था क्या कभी बदलेगी....????
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शनिवार, 15 दिसंबर 2012

!! दिल से !!

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जब मयस्सर ना हो
रोशनी सूरज की,
जब ना दिखे
दीपक दूर-दूर तक
टिमटिमाता कोई,
जब कोई जुगनू
गुज़रे भी ना
आस-पास से,
और उतर जाए
घना अन्धकार
भीतर तक,
तब
'स्व-चिंतन' की
एक चिंगारी
कर देती है रोशन
पथ को,
जिस पर चलते हुए
मिल जाते हैं
झुण्ड जुगनुओं के,
सजने लगाती है
दीप मालाएं,
और
कईं-कईं सूरज
उगने लगते हैं !
'स्व- चिंतन' की चिंगारी से
अंधेरों को
भष्म होना ही होता है !!

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!! दिल से !!

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सुन रहा हूँ
मौन रह कर
आस-पास पसरी
खामोशियों को....
खामोशियों का
मुखर हो जाना
'गर बन सकता है
मेरी चुप्पी का कारण,
तो किसी दिन
मैं
मुखर भी हो सकूंगा
इन्हीं खामोशियों
के कारण.........!!
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बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

!! 'देश हित' स्वतन्त्र चिंतन मांग रहा है !!

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.......आज आवश्यकता इस बात की है कि 'पुरानी घाघ पार्टियों' का जो 'चश्मा' हमने लगा रखा है,उनकी 'बेईमानियों' को देखते हुए उसे उतार फेंक देना चाहिए,और इस देश के लिए जो नयी 'बयार',जीवन रक्षक के रूप में बह रही है,उसे अपनाया जाना चाहिए ! 
......देश को खोखला कर के रख देने वाले राजनैतिक दलों का आखिर पल्लू क्यूँ थाम कर रखा जाए ? क्या 'देश हित' से बड़ा किसी भी राजनितिक पार्टी का हित हो सकता है,या कि समझा जाना चाहिए ? पार्टीयों के पहने हुए 'चश्मों' ने इस देश का बहुत नुक्सान किया है,क्योंकि उन पार्टियों की हर 'काली करतूत' को हम माफ़ करके अपनी 'पार्टी-भक्ति' ही दिखाते रहे हैं !
...... 'देश हित' स्वतन्त्र चिंतन मांग रहा है. 
......यही सही वक़्त है कि विवेक जागृत कर सोचा जाए कि अब तक जिन पार्टियों के हम अंध भक्त बन कर 'वोट बेंक' बने रहे,आखिर उन पार्टियों ने इस देश को कहाँ पहुंचाया ? इस देश के आम इंसान के लिए उसने क्या किया ?? 'लोकतंत्र' पर 'बेईमान तंत्र' का लेबल किसने मज़बूती से चस्पा कर दिया ??? 
......पार्टी विशेष की अंधभक्ति और चापलूसी से ऊपर उठ कर देशहित को सर्वोपरि रखने वाला ही इस देश के प्रति अपने फ़र्ज़ को निभा पायेगा............!!!!!
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गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

आखिर कौन है ?!

!!!!!!!!!! आखिर कौन है ?! !!!!!!!!!!
ये जो
हर हाल में
"मौन" है !
आखिर कौन है ?!
आखिर कौन है ?!
'राजा' है
या है 'मोहरा' ?
सच पे है
घना कोहरा !
बेईमानो की यहाँ
भीड़ बहुत है,
दलालों के यहाँ
'नीड़' बहुत है !
बिगड़ गई है
दशा,देश की,
टूटी मर्यादा,
'श्वेत' भेष की !
व्यवस्था सारी
चौपट है,
कुर्सियों पे
चढ़े 'नट' है !
घपलों का
ना और-छोर है,
'चोर' कोई,
कोई 'महा चोर' है !
''रोबोट'' है,या
उसका 'क्लोन' है ?
ये जो
हर हाल में
"मौन" है !
आखिर कौन है ?!
आखिर कौन है ?!

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