बुधवार, 29 दिसंबर 2010
रविवार, 26 दिसंबर 2010
शनिवार, 25 दिसंबर 2010
!! प्याजनामा-4 !!
*********** !! प्याजनामा-4 !!*********** सड़क किनारे एक भिखारी,किसी द्वारा फेंके गए सड़े-गले "प्याज" से "बासी रोटी" खा रहा था.तभी वहां से चमचमाती गाडी में एक 'नेताजी' अपने चमचों के साथ गुजर रहे थे,भिखारी के पास रुके और उसे "प्याज" से रोटी खाते देख खुश हो गए.मूंछों पर ताव देकर अपने चमचों से बोले 'देखो हमने देश से गरीबी मिटा दी.एक भिखारी भी "प्याज" से ...रोटी खा रहा है.कौन कहता है देश में गरीबी है.?'
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!! प्याजनामा-3 !!
********** !! प्याजनामा-3 !! **********
'' दुनिया के सारे मसखरेकम हैं आजहमें हंसाने के लिए,एक ''प्याज'' अकेला ही है काफीहमें रुलाने के लिए !!"
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!! प्याजनामा -2 !!
**********!! प्याजनामा -2 !!**********
"" प्याज बोला इन्सां सेतू क्या छीले मोहे,'सरकार' की महरबानी सेअब मैं छीलूंगा तोहें !""
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!! प्याजनामा-1!!
****** !! प्याजनामा-1!!******
आज-कल 'प्याज'
जो हमसे है नाराज़,
यूँ बोला मुझसे आज-
'' अबे इंसान की औलाद
तू रोज़ मुझे
काटता है,
सब्जियों में डाल कर
खाता है,
और
चटनी बना कर
चाटता है.
अब देख
तेरा जेब मैं काटूंगा ,
और
तुझसे दूर रह कर भी
तेरी आँखों में
पानी ला दुंगा !! ''
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मंगलवार, 21 दिसंबर 2010
शुक्रवार, 26 नवंबर 2010
!! बेचारा इंसान !!
!! बेचारा इंसान !!
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कुत्ता
कुत्ता ही रहा!
भौंकता रहा,
काटता रहा,
दुम हिलाता रहा,
वफादारी निभाता रहा.
कुत्ते ने कभी
इंसान बनने की
कौशिश नहीं की.
कुत्ता
कुत्ता ही बना रहा,
पूरा कुत्ता.
इंसान
इंसान ही था.
बहुत समय तक
इंसान,
इंसान ही
बना रहा.
फिर
इंसान ने
कुत्ता बनना शुरू किया
वो भौंकने लगा,
काटने लगा,
दुम भी हिलाने लगा ,
लेकिन
वफादार नहीं
बन पाया!
कुत्ता बनने की कौशिश में
इंसान
न तो
पूरा कुत्ता बन पाया,
ना ही पूरा
इंसान ही रह पाया!
आधा इंसान,
इंसानियत के बगैर !
आधा कुत्ता,
वफादारी के बगैर !!
बेचारा इंसान!!!!!!!!
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!! मानवता !!
************************** !! मानवता !! **************************
आज सवेरे घर से बाहर निकला तो एक जगह देखा कि कुतिया के छोटे-छोटे पिल्लै,कडकडाती ठण्ड से बचने के लिए एक दुसरे में गुत्थमगुत्था हो रहे हैं....मुझे बचपन के दिन याद आगये....कैसे कुतिया की 'डिलेवरी' पर मोहल्ले वाले,बच्चों की अगुवाई में उसे गुड का हलवा बना कर खिलाते थे....उसके बच्चों के लिए टाट का घर बनाते थे.... उसके बच्चों और उसके लिए समय-समय पर खाने का प्रबंध करते थे....!!!! मुझे मालुम है मेरे कुछ'नयी पीढ़ी' के शहरी नौज़वान दोस्तों को मेरी ये बातें अटपटी,नितांत 'गवारुं' और आश्चर्यजनक लगेगी लेकिन क्या करूँ....उस समय का सत्य तो यही था....!! आज देखता हूँ ...इंसान को इंसानों के लिए ही फुर्सत कहाँ है ..!!! भीड़ में इंसान,गिरे हुए इंसान को कुचलते हुए निकल जाता है....,फुटपाथ पे पड़े किसी असहाय इंसान को नज़रंदाज़ कर जाता है.... किसी भूखे की लाचारी समझे बिना उसे 'उपदेश' झाड जाता है......!! कुत्तों की तो कौन कहे....!!! इंसान,इंसान के बारे में ही लगभग संवेदना -शुन्य सा जान पड़ता है....!! सोचता हूँ उस समय 'सहज मानवता' के साथ जी रहे इंसान ने आखिर क्या खोया..... ????? और आज आपा-धापी में लगे,इंसानियत को दोयम दर्जे का मानने वाले इंसान(???....) ने आखिर क्या पा लिया है...... ????********************************************
बुधवार, 24 नवंबर 2010
--- इंसानी फितरत ---
--- इंसानी फितरत ---
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ईश्वर-अल्लाह ने
बनाया था मुझे
'मुहब्बत'
लुटाने के लिए !
मैंने अपनी
'औकात'
दिखा दी,
मैं हो गया आमादा
उन्हीं को
लड़ाने के लिए !!
!!! सबको सन्मति दे भगवान् !!!
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