सोमवार, 30 सितंबर 2013
गुरुवार, 1 अगस्त 2013
!! आखिर करता क्या है आदमी???? !!
!!! आखिर करता क्या है आदमी???? !!!
आखिर करता क्या है आदमी????
उठकर सुबह पीता है बैड टी,
पलटते हुए पन्ने अखबार के !
ये अलग बात है कि
मुंह अँधेरे आए दूधिये से उसने
ले लिया हो दूध
और चढ़ा दिया हो गैस पर....
या कि
नल में आते हुए
म्युनिसिपल्टी के पानी को
भर दिया हो मटकों में
अल-सुबह....,
और शायद
बाँध भी दिए हो
स्कुल जाते बच्चे के
बूट के फीते
और छोड़ भी आया हो
स्कुल की बस तक....!!
लेकिन ये भी क्या कोई काम हुआ.....!
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
शेविंग बना,नहा-धोकर
आराम से करता है
गरमागरम नाश्ता,
और भाग जाता है दफ्तर
या कि दुकान पर
घर के कामों से बचते हुए.....!
ये अलग बात है कि
तेज कदमों से पैदल चलते हुए
या कि
बस -ट्रेन में धक्के खाते हुए
दिमाग उलझा रहता है उसका
पत्नी की छोटी-मोटी पीड़ा में,
या कि
बच्चों को
अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाने में.....!!
लेकिन ये कोई काम है क्या?????
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
दफ्तर में
ऐश करता.....
चाय पीता......
गप्पे मारता.....
टाईम पास करता......
या कि
दुकान पर
आराम से बैठ
नोट गिनता है आदमी.......!!
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
ये अलग बात है कि
दफ्तर में
बैठा आदमी
कठिन से कठिन काम
जल्दी करने का तनाव
भोगता है अनवरत
ताकि तरक्की हो जल्दी
और बीबी-बच्चों
की ख्वाहिशों को
कर पाए पुरा ......
और दुकान पर नोट गिनता आदमी
अल सुबह से देर रात
खाना-पीना भूल
करता है हाड़तोड़ मेहनत
ताकि बीबी-बच्चे के ख़्वाब
हो जाए पुरे....!!
लेकिन ये भी क्या कोई काम है?
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
शाम को घर लौटते हुए
बैठ जाता है किसी
चाय के ठेले पे
दोस्तों के संग,
बची-खुची गप्पे मारने
और घर के कामों से बचने के लिए ....!!
ये अलग बात है कि
घर बनाने....
या कि
बच्चों की फीस भरने....
बीबी का इलाज़ करवाने......
बहन की शादी करने.....
आदि-आदि के लिए
पैसों का जुगाड़ करने के लिए
चिंतित सा
दोस्तों से करता हो मशवरा......!!
लेकिन ये भी क्या कोई काम है?????
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
रात को
आदमी आता है दफ्तर/दुकान से.....
सुनता है मांगे बीबी-बच्चों की....
पुरे दिन घूमते-फिरते हुए
ऐश-मौज करने,गप्पे मारने के
ताने सुनते हुए
कटवाता है सब्जी,
पानी के साथ
हलक में उतारते हुए निवाला
''दिन भर घर में खटती हुई पत्नी" की
सुनता है पीड़ा.....
और चिंतन-चिंता की उलझन में उलझ
उनींदा सा सो जाता है आदमी......!!!
तो फिर
आखिर करता क्या है आदमी????
????????????????????????????????????
-- अशोक पुनमिया --
शनिवार, 13 जुलाई 2013
रविवार, 16 जून 2013
????????? हेप्पी फादर्स डे ?????????
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!!!!! हाय डेड !!!!!
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हाय डेड,
आज खुश हो जाओ
आज आपका दिन है !
''अच्छा''!
हाँ 'डेड',
आज 'फादर्स डे' है !!
''अच्छा''!
हां डेड,
बोलो डेड
आपको क्या चाहिए......,
मोबाईल भिजवा दूँ.....
लेपटॉप.......
या कि टेबलेट ठीक रहेगा....!
''अरे नहीं-नहीं बेटा.....''
अरे डेड
आज तो कुछ ना कुछ 'गिफ्ट' दूंगा ही....
अच्छा तो
आप कहो तो
ब्रांडेड घडी......
शू.........
बेल्ट......
वॉलेट.......
का पैकेज ही भिजवा देता हूँ.....
''अरे नहीं-नहीं बेटा.....''
अरे डेड,
आज तो आपका दिन है.....
आज तो आप जो भी मांगो
मैं देकर ही रहूंगा.......!!
''अच्छा बेटा,
थोड़ा समय निकाल कर
घर आ जाओ,
मुझे और तुम्हारी मां को
तुम्हारा थोड़ा सा समय चाहिए.....''
''ओह डेड......
सॉरी......
ये क्या मांग दिया आपने......????
सॉरी डेड..... सॉरी.....!!!!!!
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????????? हेप्पी फादर्स डे ?????????
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शनिवार, 4 मई 2013
!! डूबता हुआ ज़हाज़ और चूहों का जुगाड़ !!
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......हिन्दुस्तान खाने-पिने के शौक़ीन लोगों का देश है ! यहाँ खाना-पीना अनवरत चालु रहता है ! इंसान घर में रहे तो कुछ ना कुछ खाता रहता है.....दफ्तर में जाने के बाद भी अपनी परम्परा निभाता रहता है...!ऑफिस में ऑफिशियाली टेबल के 'ऊपर' से खाता है,और अनऑफ़िशियलि टेबल के 'निचे' से खाता है!मतलब खाना-पीना कभी रुकता नहीं!
......राजनीति में तो एक से एक महारथी हुए हैं ! सीमेंट,चूना,राशन,सड़कों में खाने वाले तो यहाँ थोक में मिलेंगे जिनका हिसाब रखना भी नानी की याद दिला सकता है ! महाधुरंधरों ने तो 'तोपों,गोला-बारूद,हवाई जहाज़ों,पनडुब्बियों, हेलिकोप्टरों तक को नहीं छोड़ा ! इनको पुरा का पुरा निगल गए और डकार तक नहीं ली ! बचपन के खाने-पीने के शौक ने हाजमा इतना मज़बूत बना दिया कि हर चीज़ हज़म...! 'गौ माता' जब उपवास करने लगी और उसके 'थन' मे से दूध की जगह जब आँखों में पानी आने लगा तो पता चला कि कोई 'स्वनाम धन्य' देश खवैया, गौमाता का चारा ही चर गया है ! अब गौमाता कहाँ अर्जी लगाती ?बेचारी गौमाता यही सोच-सोच कर अपना ग़म कम करती रही कि जिसने भी मेरा चारा खाया होगा वो भी आखिर 'दूध' ही देता होगा ! लेकिन उसे ये देख कर बड़ा दुःख हुआ कि कमबख्त 'वे' सिर्फ 'गोबर' दे रहे हैं....और वो भी किसी काम का नहीं !
......कहते हैं कि "कोयले की दलाली में हाथ काले हो जाते हैं !' होते होंगे ! हमारे लीडरों के पास तो इसका भी तोड़ है ! कोयले को हाथ लगाओ तो हाथ काले होंगे....,अगर सीधा का सीधा उसे 'डकार' ही जाओ तो कहाँ से हाथ काले होंगे ? तो भाई लोग डकार ही गए कोयला ! अब ये अलग बात है कि वो कोयला अन्दर जा कर धधक रहा है और उसकी आंच से बहुत कुछ जल रहा है !! अब बेचारे कोयला खाऊ लोग करते भी क्या....? उन्होंने तो ''कोयले की दलाली...'' वाली कहावत ही सुन रखी थी....! उन्हें थोड़ी ना पता था कि ये कोयला अन्दर जा कर भी धधक सकता है...!!
......अब देखिये, इस देश को ''मामू'' बनाना ही बाकी रह गया था ! 'रेल' ही जब 'मामाश्री' की हो तो फिर तो पूरा 'रेल मंत्रालय' ही 'ननिहाल' हो गया.....और 'नहिहाल' में तो फिर कुछ भी किया जा सकता है.....! 'मामा' की बहती गंगा में अगर 'भांजा' हाथ ना धोएगा तो फिर कौन धोएगा...?
......डूबते हुए ज़हाज़ को देख कर ज़हाज़ पर सवार 'चूहे' अपना जुगाड़ करने में लगे हैं......!! अभी तो आगे-आगे देखिये कईं भांजे,भतीजे,बेटे,चाचा,ताऊ,फूफा, गुल खिलाने बाकी है...!!!
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बुधवार, 27 मार्च 2013
!! संजू की सज़ा माफ़,काटजू को भारत रत्न !!
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......देश की छोटी-मोटी जेलों में बंद हज़ारों 'चवन्नी चोरों,विचाराधीनों और निरपराधियों' को नज़रंदाज़ करते हुए 'ममता बनर्जी' का कहना है कि वे 'संजू बाबा' के पिताजी स्वर्गीय श्री 'सुनील दत्त' के साथ बहुत काम कर चुकी है,उन्हें अच्छे से जानती है.इस लिए 'संजू बाबा' की सज़ा माफ़ की जानी चाहिए ! 'ममता बनर्जी' के इस बयान से राजनीति हलकों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है,क्योंकि कईं स्वनाम धन्य 'नेताओं' के 'दाउद,गवली,राजा भैया' जैसी कईं महान हस्तियों से घनिष्ठ सम्बन्ध है,जिन पर 'फ़ालतू' के केस चल रहे हैं,अब उनकी सज़ा की माफ़ी की दरख्वास्त भी सरकार से सहज ही की जा सकेगी, जिससे उनकी भी तमाम सजाएं माफ़ हो और 'दिग्विजय' उन्हें भी 'भारतरत्न' दिए जाने की वकालत कर सकें !
......इधर शत्रुध्न सिन्हा, माननीय अमर सिंह,जयाप्रदा,जया बच्चन भी 'संजू बाबा' के अपनी बिरादरी का और पहचान का होने के कारण 'न्याय' को एक तरफ रखते हुए 'संजू बाबा' को सज़ा माफ़ी के लिए एडी-चोटी का जोर लगा रहे थे,अतः इस खबर से उनकी ख़ुशी का भी कोई ठिकाना ही नहीं है !
......सूत्रों की मानें तो न्याय व्यवस्था को 'ठेंगा' दिखाते हुए 'संजू बाबा' की सज़ा माफ़ कर दी गयी है! इस खबर से देश का 'बुद्धूजीवी' वर्ग बहुत खुश है,क्यों कि इससे 'देश' पर आई एक बड़ी आफत टल गयी है! ख़ास सूत्रों का कहना है कि 'संजू बाबा' की सज़ा माफ़ी से गदगद हो कर 'दिग्विजय सिंह' ने श्री 'काटजू' को 'भारतरत्न' देने की मांग सरकार से की है,क्यों कि श्री 'काटजू' ने अपने 'रिटायरमेंट' के बाद भी एक 'धांसू फैसला' देते हुए 'संजू बाबा' को माफ़ी देने का 'आदेश' दिया था, जिसे कोई भी टाल नहीं सका ! श्री 'दिग्विजय सिंह' की 'भारतरत्न' वाली मांग को मान लिए जाने की पूरी संभावना है !
......कल 'मुम्बई चौपाटी' पर एक बड़ी आम सभा का आयोजन भी रखा गया है,जिसमें मुम्बई बम काण्ड में मारे गए निरपराध लोगों के दुखी परिजनों को ये बताया जाएगा कि तुम्हारे अपने तो जो असमय काल के गाल में समा गए,अब इस दुनिया में है नहीं,तो फिर बेचारे 'संजू बाबा' को अब क्यों दुखी किया जाये! 'संजू बाबा' तो मासूम है,और उन्होंने दाउद या उसके हमनवाओं से 'दोस्ती' रख ली या 'ए के - 47 जैसे 'खिलोनें' रख लिए तो तो कौनसा बड़ा गुनाह किया है! इस सभा की अध्यक्षता श्री 'दिग्विजय' करेंगे और माननीय 'काटजू' मुख्य अतिथि की हैसियत से उपस्थित रहेंगे! वक्तागणों में अमरसिंह,शत्रुघ्न सिन्हा, जया बच्चन,जयाप्रदा सहित ममता बनर्जी भी सभा की शोभा बढ़ाएंगे!
......इस लेख को 'होली' के रंग में और 'भंग की तरंग' में लिखा गया है.....कृपया आप भी इसी तरह पढ़ें और 'बुद्धूजीवियों' की तरह बिना बात 'टेंशन' में आने से बचें !!
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शुक्रवार, 22 मार्च 2013
!! संजू बाबा,अपराध और सज़ा !!
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......बीस साल के लम्बे इंतज़ार के बाद आखिर 'संजय दत्त' को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'सज़ा' सुना दी गई. इस महादेश में यूँ तो हर रोज 'सालों' के इंतज़ार के बाद कईं फैसले होते हैं, लेकिन चूँकि ये एक 'सेलिब्रिटी' से जुडा मामला है, इसलिये इसकी चर्चा चारों तरफ है.
......इस फैसले के बाद कईं लोगों को संजय दत्त 'मासूम' नज़र आ रहे हैं, तो कईं लोगों को फैसला देरी से सुनाए जाने का गम है ! 'संजू बाबा' तो खैर दुखी है ही. उनका ये कहना कि इस सज़ा को मेरे 'बच्चे' और मेरी 'पत्नी' भी भुगतेगी, सही होते हुए भी कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि ऐसी बातें तो 'अपराध' करने से पहले ज़ेहन में आ जानी चाहिए!
......बहरहाल,हमारे देश में 'सेलिब्रिटी' से जुड़े अपराधिक मामलों में फैसला, सज़ा के रूप में आना,महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से 'कानून का राज' और 'न्याय व्यवस्था की सार्थकता' झलकती है. एक 'सेलिब्रिटी' को तो अपने आचरण का विशेष तौर पर ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि चाहे-अनचाहे उसका अनुसरण अनेक लोग करते हैं, और अपना 'आदर्श' तक भी मानते हैं. उनका आचरण 'समाज' को 'देश' को प्रभावित करता है ,और इसलिए उनसे बेहतर आचरण की उम्मीद की जाती है.
......'सेलिब्रिटी' होने से या अपराध के बाद उपजी या दिखाने के लिये उपजा दी गई 'अच्छाईयों' से अपराध की गंभीरता कम हो जानी चाहिए, यह कैसा तर्क है? जहां तक फैसले में अत्यधिक देरी की बात है, तो उसमें क्या सिर्फ अदालत का ही दोष है? अक्सर गंभीर अपराधों के मामले में ये देखने में आता है कि अपराधी और उसके वकील की कोशिश ये रहती है कि कैसे भी करके मामले को इतना लंबा खिंचवा दिया जाए, कि समय के साथ गवाह,सुबूत और अंततः मामला ही इतना कमज़ोर हो जाए कि सज़ा की गुंजाईश ही ना रहे या फिर न्यूनतम सज़ा ही मिल पाए ! क्या इस हकीक़त से नज़रें चुराई जा सकती है ? फिर आखिर क्यों सिर्फ न्याय व्यवस्था को ही दोष दिया जाए ?
......'संजय दत्त' के अपराध के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उसे देर से ही सही, उचित सज़ा सुना कर ना केवल न्याय की निष्पक्षता को ही सिद्ध किया है, अपितु कानून से ऊपर इस देश में कोई भी नहीं है, इस बात को भी पुख्ता ही किया है. इस सिद्ध हो चुके अपराध के लिए मिली सज़ा पर हाय तौबा मचाने वालों को ज़रा उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए,जो निरपराध होते हुए भी तथाकथित 'कानून के रखवालों', 'शातिर' लोगों की 'चालों' और अपनी 'मजबूरियों-लाचारियों' के कारण विभिन्न जेलों में सालों से सड रहे हैं!
......कोई सेलिब्रिटी है या बड़ा आदमी है इसलिए उसका 'गंभीर अपराध' भी क्षम्य है या केवल सांकेतिक सज़ा के काबिल है और कोई गरीब,मजबूर,लाचार है इसलिए उसका 'छोटा' अपराध,या 'बिना अपराध' किये भी वह वर्षों तक जेलों में सज़ा भुगत कर सड़ता रहे,इस सड़ी हुई सोच को कब्र में दफ़न करके ही एक बेहतर समाज और देश की कल्पना की जा सकती.
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शनिवार, 9 मार्च 2013
!! गुंडों की 'पोषक' व्यवस्था !!
.....'गुंडे' सिंहासनों की ओट में बेख़ौफ़ है.....कर्तव्यपरायण-देश भक्त लोग गुंडों के हाथों मारे जा रहे हैं.....सत्ता के सिंहासन पर बैठे 'दोगले' लोग, मार डाले गए देश भक्तों और कर्तव्यपरायण लोगों को चंद लाख रुपयों के चेक तथा तमगे दे कर मामले को ख़त्म करने की परम्परा निभा रहे है.....'गुंडे' फिर-फिर अपने कारनामें दोहराने लगते है......'सरकार' फिर-फिर चेक और तमगे बांटती है.....गुंडों की यह 'पोषक' व्यवस्था क्या कभी बदलेगी....????
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बुधवार, 19 दिसंबर 2012
शनिवार, 15 दिसंबर 2012
!! दिल से !!
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जब मयस्सर ना हो
रोशनी सूरज की,
जब ना दिखे
दीपक दूर-दूर तक
टिमटिमाता कोई,
जब कोई जुगनू
गुज़रे भी ना
आस-पास से,
और उतर जाए
जब मयस्सर ना हो
रोशनी सूरज की,
जब ना दिखे
दीपक दूर-दूर तक
टिमटिमाता कोई,
जब कोई जुगनू
गुज़रे भी ना
आस-पास से,
और उतर जाए
घना अन्धकार
भीतर तक,
तब
'स्व-चिंतन' की
एक चिंगारी
कर देती है रोशन
पथ को,
जिस पर चलते हुए
मिल जाते हैं
झुण्ड जुगनुओं के,
सजने लगाती है
दीप मालाएं,
और
कईं-कईं सूरज
उगने लगते हैं !
'स्व- चिंतन' की चिंगारी से
अंधेरों को
भष्म होना ही होता है !!
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भीतर तक,
तब
'स्व-चिंतन' की
एक चिंगारी
कर देती है रोशन
पथ को,
जिस पर चलते हुए
मिल जाते हैं
झुण्ड जुगनुओं के,
सजने लगाती है
दीप मालाएं,
और
कईं-कईं सूरज
उगने लगते हैं !
'स्व- चिंतन' की चिंगारी से
अंधेरों को
भष्म होना ही होता है !!
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