मंगलवार, 30 जून 2015

!!पगडण्डी!!

!!पगडण्डी!!
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......क्या आपको गाँव की पगडण्डी याद है?अरे वही जो गाँव में कहीं से भी शुरू हो कर कहीं भी चली जाती थी! सड़कें थी ही कहां! कच्चे रस्ते दूर तलक चले जाते थे.साथ साथ पगडण्डीयां भी चलती रहती थी! गाँव में सुबह सवेरे उठ कर जंगल जाना हो या फिर पनघट पर या कि माता जी के मंदिर जाना हो या किसी खुले मैदान में,बस पगडण्डीयां ही सहारा थी.
......इन पगडंडियों पर कितना अपनत्व पलता था! कभी कभार किसी पगडण्डी पर कोई काँटा गिर जाता या कि बड़ा सा पत्थर, जिस भी राहगीर को पहले दिख जाता वो उसे हटाये बिना आगे नहीं बढ़ता! पीछे आने वाले राहगीर की ये चिंता ये ख्याल उस पगडण्डी पर चलने वालों की विशेषता थी! धूल से सनी उजली पगडंडियों के जमाने में उस पर चलने वाले पथिकों के दिल भी उजले हुआ करते थे! आज की सरकारी सड़कें काली कलूटी, जिस पर फुर्र से अपनी ही धुन में गुजर जाने वालों के दिल भी कमोबेश उसी सरकारी काली सड़क के रंग में रंग से गए हैं! इन सड़कों पर कौन आया, कौन गया, किसे याद रहता है! इन काली कलूटी सड़कों पर इंसान कहाँ हैं! इन पर तो सिर्फ वे मशीनें दौड़ती हैं, जिनके सीने में दिल नहीं है. ये मशीने कहाँ पहचानती है इंसानों को! इंसान हो या जानवर इन्हें उनसे कहाँ बात करना आता है! कहाँ उनके साथ चलना, सम्बन्ध बनाना आता है! रिश्ते की गर्माहट उनमें कहाँ! ये तो बस कुचल सकती हैं उनको! सडकें ले जाती है जरुर हमें, लेकिन उस मुकाम पर नहीं पहुंचाती, जहां इंसान,इंसानियत,अपनापन आदि मिले! पगडण्डी ले जाती हैं वहां, जहां इंसान,इंसानियत और अपनापन है! पगडंडियों का कहाँ मुकाबला कर पाती है सड़कें!
......पगडण्डी पर बतियाते हुए पैदल चलते चलते कब कितना रस्ता कट जाता था, किसी को पता ही नहीं चलता! पगडंडियों के आस पास की प्रकृति से राहगीर का सहज संवाद चलता रहता.कंकड़,पत्थर,कांटें,कीड़े-मकोड़े सभी साथ साथ चलते! ना पीछे रहने का गम था ना ही आगे निकल जाने की आपाधापी! आसपास आते जाते हर राहगीर से बातचीत का सिलसिला निकल पड़ता था, जो किसी निकट-दूर के रिश्तेदार से पहचान निकलने तक जा पहुंचता था! इन्हीं पगडंडियों पर कईं सम्बन्ध-रिश्तेदारियाँ भी बन जाती! सही मायने में ये पगडण्डीयां दिल से निकल कर दिल तक पहुंचा करती थी! पगडंडियों का हमराह बना इंसान कब अपने मुकाम पहुँच जाता उसे भी पता नहीं चलता!
......आज कहाँ है पगडण्डीयाँ! कोलतार-सीमेंट की सड़कें निगल गयी इन पगडंडियों को बिलकुल वैसे ही,जैसे स्वार्थ ने इंसानियत को निगल लिया! पगडंडियों पर चलता इंसान बचा हुआ था, उसकी इंसानियत जिंदा थी, उसमें जमीर था, अपनापन था, मुहब्बत थी! पगडंडियाँ जिंदा रखे हुए थी इंसान को! आज की पीढ़ी को पगडण्डी के बारे में मालूम ही कहाँ! हमने भी कब बताया उनको! जरुरत ही नहीं समझी कभी कि इंसान से सरोकार रखने वाली पगडंडी को कभी किस्से-कहानियों में ही सही,अपने बच्चों को बताएं! आखिर हमें सड़कों से ही फुर्सत कहाँ! सरपट भागती जिन्दगी में सड़कें ही तो हो सकती है.....पगडण्डी कहाँ से आए! लेकिन रखना चाहिए,उस पीढ़ी को अपनी बातों किस्सों-कहानियों में पगडण्डी को जरूर रखना चाहिए, जिस पीढ़ी ने पगडंडियों के साथ बहुत सा वक्त गुजारा है. आप भी कभी कभार याद कर लिया कीजिये उन भूली बिसुरी पगडंडियों को........शायद आपको ये बहुत सी सुकून भरी पुरानी बातें भी याद दिला दें!
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रविवार, 28 जून 2015

!!फर्जी डिग्री-असली काम.....असली डिग्री-फर्जी काम !!

!!फर्जी डिग्री-असली काम.....असली डिग्री-फर्जी काम !!
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......आजकल फर्जी डिग्री खबरों में छाई हुई है.राज्य सरकारों के मंत्रियों से लेकर केंद्र सरकार के मंत्री तक पर फर्जी डिग्री का फर्जीवाड़ा चिपक गया है.दिल्ली के तो एक फर्जी डिग्री वाले असली मिनिस्टर जेल के हवा-पानी-खाने का लुत्फ उठा ही रहे हैं!अब देखना तो ये है कि फर्जी डिग्री के बूते असली मलाई खा रहे कितने भाई-बहन लोगों का पुलिस कस्टडी में मक्खन निकलता है!
......वैसे एक बात दिलचस्प है.फर्जी डिग्री के बूते असली मलाई खाने का फर्जी काम करने वाले आखिर अलग काम क्या करते है?वे वही काम तो करते हैं जो काम असली डिग्री लेकर असली मलाई खाने वाले लोग फर्जी तरीके से करते हैं! अब आप सोचिये  बड़ी बड़ी असली डिग्री लेकर बड़े लोग क्या कम फर्जीवाड़ा करते हैं?घपले-घोटाले करने वाले और देश को चुना लगाने वाले बड़े लोग क्या बिना डिग्री वाले हैं? एक से एक डिग्री लेकर बड़े पदों पर बैठे बड़े लोग असली डिग्री की आड़ में कितने फर्जी काम कर वारे-न्यारे करते हैं,क्या ये किसी से छुपा है?
......इधर महाराष्ट्र के एक धाकड़ नेता के कईं ठिकानों पर छापे पड़े हैं और वर्षों की उनकी और उनके निकट सम्बन्धियों की काली करतूतें सामने आने की पूरी संभावना है! पंकजा मुंड़े भी लपेटे में आ सकती है.ललित मोदी के जाल में भी कईं बड़े बड़े दिग्गज उलझ रहे हैं!वर्तमान और भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों की कम्पनियों में फर्जीवाड़े के किस्से भी खूब हवा में है! ऐसे में कुल मिला कर दृश्य ये ही बन रहा है कि फर्जी डिग्री लेकर गोरखधंधा करने वाले जितने हैं,असली डिग्री लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले उससे कहीं अधिक है! और कमाल की बात तो ये हैं कि असली डिग्री लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले बहुत ऊँचे ओहदों पर बैठे हैं और रसूखदार है.
......राजनीति का फायदा यही है कि यहाँ किसी भी ओहदे के लिए किसी भी डिग्री की जरुरत नहीं पड़ती.एक अंगूठा छाप 'जनसेवक' भी आई.ए.एस.-आई.पी.एस. को आदेश दे सकता है इंजीनियरों-डाक्टरों की फौज को लताड़ सकता है और देश से अपनी 'जै' बुलवा सकता है! तो फिर उन्हें डिग्री की जरुरत आखिर पड़ी क्यूँ? शायद इसलिए कि रुतबे में "पांच चाँद" लग जाए! चार चाँद तो वैसे ही,सत्ता में ऊँची कुर्सी पर बैठते ही लग ही जाते है! शायद ये पांचवें चाँद की चाहत ही फर्जी डिग्री का मोह पैदा करती है!
......बात तो तब है जबकि फर्जी डिग्री लेकर मौज कर रहे लोगों का भांडा फोड़ने के साथ साथ असली डिग्री लेकर तमाम फर्जी काम करने वाले बड़े पदों पर आसीन बड़े लोगों का भी भांडा फूटे और जेल की हवा-पानी-खाना उनके हिस्से में भी आये! वरना,फर्जी डिग्री के दो-चार अपराधियों की बलि लेकर असली डिग्री के बूते फर्जी काम करने वालों से मुंह फेरकर बैठ जाना तो वही बात होगी कि 'हाथी के दांत..... खाने के अलग दिखाने के अलग!' वैसे अब जबकि फर्जी डिग्री का मामला गरम है तो सरकार को लगे हाथ पुरे देश में इस बात का भी पता लगाने की गंभीर कोशिश शुरू कर देनी चाहिए कि असली डिग्री लेकर ऊँचे ओहदों पर बैठ कर कितने लोग फर्जीवाड़ा कर जम कर "मलाई जीम" रहे हैं! अगर किसी दिन इस बात का खुलासा हो गया तो यकीन मानिए इस देश में फर्जी डिग्री का गोरखधंधा स्वतः ही बिलकुल बंद हो जाएगा और लोग असली डिग्री के लिए जी-जान लड़ा देंगे.......आखिर ज्यादा "मलाई जीमने" का जो सवाल है!!  
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रविवार, 11 मई 2014

!!!!! "हाय मॉम,हैप्पी मदर्स डे" !!!!!

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!!!!! "हाय मॉम,हैप्पी मदर्स डे" !!!!!
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हाय मॉम,
आज खुश हो जाओ
आज आपका दिन है !
''अच्छा''!
हाँ 'मॉम',
आज 'मदर्स डे' है !!
''अच्छा''!
हां 'मॉम' !
बोलो 'मॉम'
आपको क्या चाहिए......,
मोबाईल भिजवा दूँ.....
सलवार सूट.......
या कि साडी ठीक रहेगी....!
''अरे नहीं-नहीं बेटा.....''
अरे 'मॉम' 
आज तो कुछ ना कुछ 'गिफ्ट' दूंगा ही....!
अच्छा तो 
आप कहो तो 
ब्रांडेड घडी......
ब्रांडेड चप्पल.........
ब्रेसलेट......
पर्स.......
का पैकेज ही भिजवा देता हूँ.....!
''अरे नहीं-नहीं बेटा.....''
अरे आज तो 'मदर्स डे',
आज तो आपका दिन है.....
आज तो आप जो भी मांगो 
मैं देकर ही रहूंगा.......!!
''अच्छा बेटा,
थोड़ा समय निकाल कर 
घर आ जाओ,
मुझे और तुम्हारे पापा को 
तुम्हारा थोड़ा सा समय चाहिए.....''!
''ओह मॉम......
सॉरी......
ये क्या मांग लिया आपने......????
सॉरी मॉम..... सॉरी.....!!!!!!
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!!!!!!!!!!! हेप्पी मदर्स डे !!!!!!!!!!!
********* अशोक पुनमिया **********
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