शनिवार, 5 नवंबर 2011

!! मुझे गर्व है तुम पर !!


बिटिया इन दिनों विदेश में है.वहां पिछले दिनों बर्फीला तूफ़ान आया...
उसी की कुछ तस्वीरें,मेरी बिटिया द्वारा ली गयी,जिसे मैं साझा कर 
 रहा हूँ.....अपनी भावनाओं के साथ....!

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बेटी,
तुम हो
सात समंदर पार
एक अनदेखी-अनजानी सी
जगह पर,
अजनबियों के बीच
बिलकुल नए माहोल में.
मुझे गर्व है
तुम पर
कि
तुमने
हिम्मत दिखाई
और कुछ सीखने का
ज़ज्बा लेकर
चली गयी
सात समंदर पार !
घर पर
जब तुम खाती थी
बर्फ का गोला भी
तो मैं
रोक देता था तुम्हें
यह कह कर
कि
सर्दी लग जायेगी,
ज़ुकाम हो जाएगा......
अब
सात समंदर पार तुम
बैठी हो
बर्फ से घिरी हुयी,
बर्फ के बीच में
तब भी मैं
बैखोफ हूँ
कि
मेरी बेटी में है
हिम्मत-साहस
और ज़ज्बा
कुछ सीखने का,
कुछ कर गुजरने का......
हर विपरीत परोस्थिति से
लड़ने का.......
हर हाल में
आगे ही आगे
बढ़ने का........
बेटी
मुझे गर्व है
तुम पर. 
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

!! पते की बात !!

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---------------------------------- पते की बात -----------------------------
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समय बड़ा खराब है ! इस समय 'पते की बात' करना,खतरे से खाली नहीं है ! अच्छों-अच्छों के 'पते',लापता हो रहे हैं ! भारी-भरकम 'पते' वाले कईं कर्णधार किसी डाल से टूटे सूखे 'पत्ते' की तरह जा कर सीधे 'तिहाड़' में गिर गए,तो कुछ का 'पत्ता' कटते-कटते रह गया ! कुल मिला कर इस वक़्त 'पते की बात' करना ही फ़िज़ूल सा लगता है !
आखिर किसे 'पता' था कि 'अन्ना' नाम कि कोई आंधी आएगी और कईयों के 'पत्ते' काट जायेगी ! दिल्ली में सत्ता के 'पते' पर बैठे कईयों के 'पते' कब बदल जायेंगे,क्या कोई कह सकता है ! केंद्र के चुनाव अभी दूर है,लेकिन कईं  कुर्सी भक्तों को अपने लापता होने का अभी से 'पता' चल गया है ! वे इस बात का 'पता' करने में जुटे हैं,कि आखिर हमारा 'पत्ता' काटने वाले का असली 'पता' क्या है ! अगर उन्हें उसका असली 'पता' मिल जाए,तो वे बस एकजुट हो कर उसी का 'पत्ता' साफ़ करने में लग कर सत्ता के बचे-खुचे दिनों को सार्थक कर दें ! अब ऐसी स्थिति में आप ही सोचिये 'पते की बात' कैसे की जाय !
.वैसे भी सत्ता में बैठ कर माल-पुए खाते-खाते कब पांच साल निकल जाते हैं,'पता' ही नहीं चलता ! 'पता' चलता है तो बस इतना कि इन पांच सालों में जो 'लापता' या 'बे-पता' थे,उनका 'पता' राजधानी के बंगलों पर चस्पा हो गया है ! ये अलग बात है कि राजधानी में एक अदद 'पता' रखने वाले भी अपने मोहल्ले,गाँव या शहर में तो 'लापता' ही रहते हैं ! अब ऐसे में 'पते की बात' करना कोई बहुत समझदारी वाला काम नहीं हो सकता !
सच कहूँ तो मुझे कच्चा-पक्का 'पता' ज़रूर चला है कि अगली बार अवाम, राजधानी के बंगलों का 'पता' देने वाले मोहल्ले,गाँव और शहरों के 'पते' वाले,'लापता' लोगों को अपने असली 'पते' पर लाने की ठान चुका हैं ! अब विश्वसनीय तौर पर तो मुझे भी 'पता' नहीं कि दिल्ली में या यूँ कहें कि राजधानी में कितनों के 'पते' बदल जायेंगे,या 'पत्ते' कट जायेंगे,लेकिन इतना अवश्य है कि अवाम को जो 'पता' चला है,वो कईयों को 'लापता' या 'बे-पता' ज़रूर करेगा.अब ऐसे में आखिर 'पते की बात' करके भी क्या फायदा ! 
वैसे मेरा 'पता' यही रहेगा,आप जब चाहें यहाँ तशरीफ़ ला सकते हैं.
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शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

!! कमाल है !!



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कमाल है !
हज़ारों
सवाल है !!
ज़वाब है गिनती के 
और
हाल बेहाल है !!!
कमाल है !
महंगाई ने
कर दिया है
छिन्न-भिन्न,
रोटी के सामने
लग गया है
प्रश्न चिन्ह !
थाली से गायब 
अरसे से ही 
सब्जी-दाल है,
कमाल है !
कैसा दूध !?
कैसी चाय !?
कॉफी ने भी
कह दिया बाय !
घी-तेल पर 
पहले से ही
मचा बवाल है,
कमाल है !
कनिमोड़ी-कलमाड़ी 
कलयुगी राजा,
देश का खूब
बजाया बाजा !
'मनमोहन' के
मंत्री-संत्री
मचा रहे
धमाल है,
कमाल है !
मेहनतकश,
हरामखोरों से
थक गया है,
गरीब का पेट
भूख से
पिचक गया है !
'कुर्सी' पर विराजित
सफेदपोशों के
टमाटर जैसे
लाल गाल है,
कमाल है !
खरगोश-बकरी
मर रहे हैं,
बिच्छू-सांप
राज कर रहे हैं !
भेड़ियों के तन पे
भेड़ की खाल है,
कमाल है !
हज़ारों
सवाल है !!
ज़वाब है गिनती के 
और
हाल बेहाल है !!!
कमाल है !
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रविवार, 25 सितंबर 2011

!! बहुत मुखोटे हैं !!



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बहुत मुखोटे हैं !
मशवरे बड़े हैं,
प्रवचन बड़े हैं,
कुएं के मेढक-
कुएं में पड़े हैं !
भाषण है भीषण,
ख्यालात छोटे है !!
बहुत मुखोटे हैं !
'मैं ' पर जोर है,
बाकी सब 'बोर' है ,
दीपक तले-
अन्धेरा घनघोर है !
ज्ञान बांटते दुनिया को-
घर में पर टोटे हैं !
बहुत मुखोटे हैं !
'सूरत ' के कायल है,
दिल से घायल है,
चेहरे पे मुस्कान बड़ी-
पर उसमें भी छल है !
असल की शक्ल में-
सिक्के खोटे हैं !
बहुत मुखोटे हैं ! 
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सोमवार, 19 सितंबर 2011

!! इम्तेहान बाकी है !!

जिस्म में मेरे जब तलक जान बाकी है,
खुदा जाने कितने और इम्तेहान बाकी है !
दोस्तों की फेहरिस्त लम्बी हुई खूब मगर,
दर्दो-ग़म में बस अब पहचान बाकी है !
यूँ तो लिखे हमने भी ढेरों शे'र अब तलक,
दे मुकम्मल पहचान वो बयान बाकी है !
'तिहाड़' खुले रखना तू दरवाज़े रात-दिन,
'कुर्सियों' पर अब भी कईं 'बेईमान' बाकी है !
फ़क़त लिखने के लिए लिखना मत 'अशोक',
लिखना है वाजिब,अगर तेरा ईमान बाकी है ! 
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सोमवार, 12 सितंबर 2011

!पकोड़े मुबारक हो !

!
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कल सुबह से शुरू हुआ बारिश का दौर जारी है.
पुरे सावन में जैसी बारिश नहीं हुयी,कल सवेरे से ऐसी झमाझम हो रही है.
नदी-नाले उफान पर है.....लोग नदियों पर तालाबों पर मज़े ले रहे हैं.
बैठे-ठाले चाय-पकोड़ों ने मज़ा दुगुना कर दिया है...कईं स्कूलों ने छुट्टी रख ली है,सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति आम दिनों से कम हो तो आश्चर्य नहीं होगा!
पिछले करीब सप्ताह भर से मुझे भी वायरल-फीवर ने परेशान कर रखा था....कल से ही थोड़ा ठीक हुआ हूँ.
फेस-बुक और ब्लॉग पर ना ही कुछ लिख पाया,ना ही कुछ पढ़ ही पाया.....
दोस्तों के टैग तक के ज़वाब नहीं दे पाया....!
आने वाले दिन शायद अच्छे हो और मैं वापस सक्रीय हो पाऊं.
काम की आपाधापी से समय चुराने का ये बेहतरीन मौक़ा है......इसको खो कर भी कुछ पाया तो क्या पाया........!
अगर आपके वहां भी बादल मेहरबान हो रहे हो, तो आपको भी गर्मागर्म चाय की चुस्कियां और पकोड़े मुबारक हो !
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गुरुवार, 8 सितंबर 2011

!!बम ब्लास्ट पर !!

-- दिल्ली हाईकोर्ट में बम ब्लास्ट पर --
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चीखना मत,चिल्लाना मत
रोना मत,
कितनी ही बेदर्दी से कुचले जाओ
आहत होना मत !
.ध्यान रखना-
देश के भाग्य विधाताओं से
जुबां तुम्हारी
कोई सवाल ना कर पाए.....
कहीं उनके 'विशेषाधिकारों' का
हनन ना हो जाए !!
चुप रहना,सह लेना
अपनी नियति मान कर
पड़े रहना,
कभी मुम्बई में
कभी दिल्ली में 
आतंकियों की
गोली खाने को
लाईन लगा कर
खड़े रहना !!
उनको राजनीति करने देना,
अस्पताल में घायलों को
तड़फ-तड़फ कर
मरने देना !
ध्यान रखना-
देश के भाग्य विधाताओं से
जुबां तुम्हारी
कोई सवाल ना कर पाए.....
कहीं उनके 'विशेषाधिकारों' का
हनन ना हो जाए !!
आतंकियों को
'अधिकार' है,
वे बम फोड़ते रहेंगे !
तुम्हारा 'कर्तव्य' है
तुम मरते रहो !!
गुनाहगार
'अफज़ल'-;कसाब'
''इन्साफ'' के लिए
ठाठ से इंतज़ार करेंगे,
बेगुनाह
भारत वासी
बस यूँ ही बेमौत मरेंगे !!
ध्यान रखना-
देश के भाग्य विधाताओं से
जुबां तुम्हारी
कोई सवाल ना कर पाए.....
कहीं उनके 'विशेषाधिकारों' का
हनन ना हो जाए !!
हर धमाके के बाद
प्रधानमन्त्री
तोते की तरह बोलेंगे--
''ये कायराना हरकत है'' !
तुम मत पूछना--
''आपने कब हिम्मत दिखाई ?''
'वे कहेंगे--
''हम हारे नहीं है.''
तुम मत पूछना--
''आप कब जीतोगे ?''
वे कहेंगे--
''सब पार्टियों को एक हो जाना चाहिए''
तुम मत पूछना--
''अपनी पगार और भत्ते बढानें में
सब पार्टियां कब अलग थी ?'' 
वे ''चवन्नी'' भर
मुआवजा देंगे,
तुम लेकर
ख़ुशी-ख़ुशी घर जाना,
बस
ध्यान रखना-
देश के भाग्य विधाताओं से
जुबां तुम्हारी
कोई सवाल ना कर पाए.....
कहीं उनके 'विशेषाधिकारों' का
हनन ना हो जाए !!  
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