सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

!! श्रृद्धांजली !!

!! श्रृद्धांजली !!

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सार्थक और सामयिक रचना .अच्छी कोशिश है सोये हुए को जगाने की पर संस्कारहीन और पश्चिमी संस्कर्ति के गुलाम कब उठने वाले है .हमारा पर्व वसंत अभी जवान है पर कहाँ किसी को ख्याल रहा .बाहारहाल धन्यवाद इस प्रस्तुति के लिए .

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  2. pyar ek khoobsurat ehsaas hai chahe koi roop ho.purvi sanskrit me prem sudha ban jivan dayini ban jata hai.yahi mai amiya prem kavita me vyakt karne ki koshis ki hun.

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  3. ''हमारा पर्व वसंत अभी जवान है पर कहाँ किसी को ख्याल रहा''.बहुत ही खुबसूरत बात कही है आपने रफत साहब.पश्चिम की ग़ुलामी कहाँ तक लेजायेगी,कहना मुश्किल है!टिप्पणी के लिए आपका आभार.

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  4. सिक्ता जी,आपकी टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत आभार

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