शनिवार, 11 अगस्त 2012

!! माँ-बाप की गलतियाँ !!

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!! माँ-बाप की गलतियाँ !!
(निवेदन : सच का सामना करने की हिम्मत रखने वाले ही इस कविता को पढ़ें.)
आदरणीय माताजी-पिताजी
आपने मुझे जन्म दिया
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
आपने जो 
बहुत बड़ी गलतियाँ की है
वो मैं नहीं छुपाऊँगा,
आखिर में 
ज़रूर बताउंगा !!
मुझे पाला-पोसा
पल-पल मुझ पर 
वार दिया,
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
आपने जो 
बहुत बड़ी गलतियाँ की है
वो मैं नहीं छुपाऊँगा,
आखिर में 
ज़रूर बताउंगा !!
जब भी मैं 
बीमार हुआ,
आप भूखे-प्यासे 
दौड़ते रहे 
डाक्टर के पास,
रात-रात भर जाग कर 
बैठे रहे उदास !
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
आपने जो 
बहुत बड़ी गलतियाँ की है
वो मैं नहीं छुपाऊँगा,
आखिर में 
ज़रूर बताउंगा !!
मुझे पढ़ाया-लिखाया
नौकरी-धंधे के काबिल बनाया,
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
आपने जो 
बहुत बड़ी गलतियाँ की है
वो मैं नहीं छुपाऊँगा,
आखिर में 
ज़रूर बताउंगा !!
मेरी शादी की,
मेरे बच्चों को 
मुझसे भी ज्यादा 
प्यार किया,
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
आपने जो 
बहुत बड़ी गलतियाँ की है
वो मैं नहीं छुपाऊँगा,
आखिर में 
ज़रूर बताउंगा !!
मुझे 'गर 
जुकाम भी हुआ
आप बहुत घबराए,
रात की बस पकड़ कर ही,
'मेरे घर' दौड़े चले आये !
तो क्या एहसान किया?
ये तो 
सभी करते ही है !
हाँ,
ये अलग बात है कि
माँ,
जब तुम हो गयी अशक्त,
और 
पिताजी की बूढी काया ने
पकड़ लिया बिस्तर,
तुम रोती रही 
रात-रात भर !
लेकिन मैं
घर नहीं आ पाया,
क्योंकि नौकरी-धंधे से 
छुट्टी नहीं ले पाया !
हाँ,
अब सुनलो आपकी गलतियाँ-
''मुझ जैसे 
स्वार्थी,खुदगर्ज़,कपूत बेटे को 
जन्म दिया,
यह आपकी पहली गलती थी !
फिर कईं बार,
मुझे कईं विपत्तियों से बचाया,
मौत के मुंह से भी 
वापस लाया.....,
ये आपकी 
सबसे बड़ी गलती थी !!
कपूत बेटे के 
सभी गुणों से युक्त 
'मैं' आज 
आप की बदौलत 
अपनी बीबी-बच्चों के साथ
मस्त हूँ !!
आप अपना बुढापा काटो
अपने ही दम पर,
मत बोझ बनों 'हम' पर !!
हमारा तो बाकी है अभी
'जिंदगी और करियर',
आपका तो बुढापा है अभी 
वैसे भी 
मौत के मुहाने पर....!
हाँ,
अंत में मैं 
ऊपर वाले से 
एक प्रार्थना ज़रूर करूंगा 
कि भगवान्
मेरे जैसा कपूत बेटा 
किसी को ना दें.....,
और 
आप जैसे माँ-बाप 
सभी को दें.......!!
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11 टिप्‍पणियां:

  1. tippani kya den aap ki kavita sochna hi band kara diya.is se jada tarif ke liye fir shabd gayab

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    1. सिक्ता जी,
      आभार आपका कविता पढने और उस पर अपनी अमूल्य टिप्पणी देने के लिए.

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  2. कविता की पहले की पंक्तिओं ने तो डरा ही दिया था ...कि क्या लिखने की कोशिश कर रहे हैं ये कवि महाशय ....पर कहते हैं ना अंत भला तो सब भला ...


    आपकी कविता में दम हैं ...एक सत्य लिए हुए ....बहुत खूब

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    1. अनु जी,
      आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर.
      आपकी सार्थक टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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  3. आज 13/08/2012 को आपकी यह पोस्ट (दीप्ति शर्मा जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

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    1. यशवंत जी,
      आभार आपका मेरी इस रचना का लिंक 'नयी पुरानी हलचल' पर देने के लिए.
      मुझे लगता है की दीप्ती जी ने मेरी रचना को पूरा पढ़े बिना ही लिंक दे दिया है...... :))

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  4. aisa to sabhi karte hain !!... uff..katu satya hai ...shayad har doosare har ghar ka

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    1. भावना जी,
      आपकी टिप्पणी के लिए शुक्रिया.
      हाँ,काफी घरों में इस तरह के हालात हैं,जो कि हमारे संस्कारों के अनुकूल नहीं है,और एक कवि हृदय होने के कारण मुझे व्यथित करते हैं.


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  5. बच्चे भूल जाते हैं कि यही अवस्था एक दिन उनकी भी आएगी .... सत्य को कहती संवेदनशील रचना

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    1. संगीता जी,
      आभार आपका इस रचना पर टिप्पणी के लिए.
      ये सही है कि बच्चे भूल जाते हैं कि उनकी अपनी संतान भी है और जिस दिन वो ऐसा ही बर्ताव उनके साथ करेगी तब उनके ऊपर क्या बीतेगी!

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