बुधवार, 26 जनवरी 2011

!! गणतंत्र !!

******* !! गणतंत्र !!*******

देशभक्ति के गीत भी बज गए !

झंडा भी फहरा दिया !!
'सन्देश' भी सुन लिए !!!
झांकियां भी निकल गयी !!!!
और मिठाई भी बंट गयी........,
एक और
''सरकारी-रस्म'' निपट गयी !!
आईये,फिर मिल-बैठ कर
देश को 'खाएं,
ग़रीब को
'कंगाल' बनायें,
'स्विस' में धन
जमा कराएं,
'वादों' की
घुट्टी पिलाएं !
'तंत्र' का यही
'मूलमंत्र है,
अहा !
मेरे देश में
कितना सुन्दर
(गण) 'तंत्र' है !! 
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1 टिप्पणी:

  1. ''सरकारी-रस्म'' निपट गयी !!
    आईये,फिर मिल-बैठ कर
    देश को 'खाएं,
    ग़रीब को
    'कंगाल' बनायें,
    'स्विस' में धन
    जमा कराएं,
    'वादों' की
    घुट्टी पिलाएं !
    'तंत्र' का यही
    'मूलमंत्र है,..wah sahib,sarkari tantr pr satik waar karta aapka wayang .jo dekha wahi likha aur yahi hakikat hai .

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