मंगलवार, 25 जनवरी 2011

!! वजूद !!

****** *!! वजूद !! ******
''सूरज'' की चाहत है
वो 'रात' को निहारे !
''रात'' की चाहत है 
वो 'सूरज' का दीदार करे !!
मगर दोनों के लिए 
ये मुमकिन नहीं !!
अच्छा है.....
शायद ये ही अच्छा है...
दोनों ही के वजूद के लिए !!!

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 पुनमिया *******

2 टिप्‍पणियां:

  1. vaah bhaayi vaah ashok ji chaand or surj ke miln ki bebsi khub khi he aapne . akhtar khan akela kota rajsthan

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  2. शाश्वत सत्य को आपने अपने अनूठे अंदाज़ में एक बिलकुल नया रूप देकर प्रस्तुत किया है .बहुत खूब .

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