सोमवार, 7 दिसंबर 2015

!! अच्छे दिनों का सरकारी चुटुकला !!

अच्छे दिनों का सरकारी चुटुकला
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 माना जाता है कि हास-परिहास करना सेहत के लिए ठीक रहता है. इस लिहाज़ से केन्द्रीय सरकार सही पटरी पर है. वो अवाम के अच्छे दिन लाने को सतत प्रयत्नशील है. अवाम के अच्छे दिन तो आयेंगे तब आयेंगे,किन्तु अवाम के एक महत्वपूर्ण हिस्से ‘केन्द्रीय कर्मचारियों’ के अच्छे दिन तो आ ही गए हैं !
    केंद्र सरकार ने अपने पचास लाख कर्मचारियों के लिए 'एडवेंचर ट्रिप' का ऐलान किया है! इसका कारण ये बताया गया है कि इससे कर्मचारियों का तनाव घटेगा और टीम भावना का विकास होगा तथा चुनौतियों को स्वीकारने की क्षमता बढ़ेगी !

    केंद्र सरकार का ये अच्छा चुटुकला है. मन हो रहा है पेट पकड़ कर ठहाके लगाऊं !
    अब देखिये,ये चुटुकला नहीं तो और क्या है ! एक तो केंद्र सरकार के कर्मचारी,यानी वैसे ही पाँचों उंगलिया घी में, और अफसरों के तो सिर भी कडाही में ! सरकारी कर्मचारी को तनाव था ही कब? तनाव तो जितना भी है, जो भी है, जैसा भी है, भोलीभाली अवाम के हिस्से में ही है ! सरकारी कर्मचारियों ने तो सारा का सारा तनाव अवाम को दे रखा है, दफ्तरों के चक्कर लगाने और जेबें गर्म करने के लिए! अब जबकि तनाव है ही नहीं तो कम क्या करेंगे !
    सरकारी कर्मचारियों में टीम भावना का विकास करना इस ‘एडवेंचर’ की दूसरी महत्वपूर्ण बात है ! अरे भाई, सरकारी कर्मचारियों के जैसी ‘टीम भावना’ और कहाँ मिलेगी? निचे से लेकर ऊपर तक जैसे मिलबांट कर खाते हैं, कोई दुसरा उदाहरण तो बता दो ऐसा ! जब ऐसी टीम भावना में कोई कसर ही नहीं है, तो उसका विकास क्या ख़ाक करोगे !
    अब रही तीसरी बात. ‘चुनौती’ स्वीकार करने कि क्षमता बढ़ाना ! चुनौती तो वे अवाम के आम आदमी को देते ही रहते हैं ! ‘जब तक तू टेबल के निचे से करारे नोट नहीं सरकाएगा, तेरा काम नहीं होगा! जा तेरी हो जो करले !’ अब इससे ज्यादा चुनौती की क्षमता उनसे और क्या चाहती है केंद्र सरकार !
    कुल मिला कर ऐसे ‘सरकारी चुटुकले’ अच्छे दिनों की संभावनाओं को पुख्ता कर रहे हैं ! ‘अच्छे दिन’ सरकार, सरकारी कर्मचारियों और धन्ना सेठों के आ जाएँ बस ! अवाम का क्या है ! वो तो सदैव ही सरकारों द्वारा दिखाए गए झूठे सपनों पर ही जीती आ रही है ! अच्छे दिनों का एक सपना और सही!! सपनों पर साठ साल गुज़ार दिए तो पांच साल और कौनसी बड़ी बात है!  
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