बुधवार, 19 जनवरी 2011

!! मन की व्यथा !!

दोस्तों,
आज मैं आप सभी के साथ अपने मन की व्यथा साझा करना चाहता हूँ.
आशा करता हूँ आप अपने अमूल्य समय मेसे कुछ लम्हें मुझे बख्श कर 
कृतार्थ करेंगे.इसी आशा के साथ......

*****************************************
जब से रूठ कर गयी हो तुम 
मुझे ना ही रातो में चैन है,
ना ही दिन में सुकून है !
बस हर लम्हा
हर हाल में 
तुम्हें पाने का जुनून है !
आखिर मुझसे
खता क्या होगयी ?
जो तुम यूँ अचानक
बिन बताए
मुझसे दूर,
मुझसे जुदा हो गयी !
मैं मानता हूँ
अपनी व्यस्तता के चलते
मैं
तुम्हारे हिस्से का
जायज़ हक
तुम्हें नहीं दे पाया ,
समय पर
तुम्हारी सुध
नहीं ले पाया .
लेकिन
इस खता की
इतनी बड़ी सज़ा...?!
तुम्हें कैसे बताऊँ !,
कैसे समझाऊं !,....
तुम्हारे रूठ कर
चले जाने से
मेरे दिन,
मेरी रातें,
बहुत पीछे
छूट गयी है....,
मेरे 
सारे ख़्वाबों की लडियां
बिखर गयी है,
टूट गयी है..... .
एक
तुम्हारे ना होने से
जिंदगी
बेमजा हो गयी है,
बेचैनी भरे दिन
और
करवटों भरी रात
मौत से भी बड़ी
सज़ा हो गयी है.
मुझे ग़म है
तो बस
इस बात का,
कि
तुमने
ज़रा भी ख्याल
नहीं रखा 
इतने पुराने साथ का.
मैंने हमेशा
तुमसे मुहब्बत की है,
तुम्हें कभी भी
तन्हाईयाँ नहीं दी है.
हाँ,
ये मुमकिन है
कि
जिंदगी ने जब भी
मेरा इम्तेहान
लिया होगा,
मैंने
ना चाह कर भी तब 
कुछ समय के लिए
तुम्हें अपने से
दूर किया होगा .
मेरी जब -जब भी
तुमसे दुरी रही होगी ,
मेरी
कोई ना कोई
मज़बूरी रही होगी.
लेकिन तुम्हारी
क्या मज़बूरी है...?
क्यूँ मुझसे
इतनी दुरी है ...?
चलो 
मैं अपनी
हर खता के लिए
तुमसे माफ़ी
मांग लेता हूँ,
सारे इलज़ाम
ख़ुशी-ख़ुशी
अपने सर लेता हूँ .
गुजारिश है तुमसे
मुझे अब
और मत तडपाओ,
जल्दी ही तुम
लौट आओ.
मेरे दिल का
चैन-ओ-सुकून
मुझे लौटा दो,
मेरे ख़्वाबों की  लडियां
तुम वापस जोड़ दो,
करवटें बदलते हुए
गुज़रती हुयी
मेरी रातों का सिलसिला
अब तोड़ दो.
तुम लौट आओ..........

तुम लौट आओ................
|
|
|
तुम लौट आओ........................
|
|
|
|
तुम लौट आओ
मेरी ''नींद''!
*****************************************

6 टिप्‍पणियां:

  1. नींद को मुख्य बिंदु मान कर श्रीमान आपने मन कि व्याथा शेयर कि है वास्तव में मुझे अपनी जिंदगी का आइना लग रही है और शायद हर पढ़नेवाले वाले को ऐसा ही लगेगा. यही सार्थक कविता कि पहचान है .

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक अच्छी कविता पढ़वाने का शुक्रिया अशोक जी

    उत्तर देंहटाएं
  3. पूरी कविता न पढ़ी जाये तो प्रेमिका या पत्नी को मनाने की कविता प्रतीत होती है, पर आप तो नींद को मनाने में सारे फूल खिला दिए. वाह! बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  4. रफत साहब,आपकी अमूल्य टिपण्णी के लिए शुक्रिया.

    उत्तर देंहटाएं
  5. राजेश जी,मेरी रचना पसंद आई,आपका आभारी हूँ अपनी मूल्यवान राय देते रहिएगा.

    उत्तर देंहटाएं
  6. ग़ुलाम साहब, सही फरमाया आपने.बहुत से मित्रों को यही लगा कि यह रूठी हुयी पत्नी या प्रेमिका के वियोग में लिखी गयी आपबीती है! वैसे नींद का रूठ जाना भी,पत्नी या प्रेमिका के रूठ जाने जितना ही बेचैन कर जाता है!आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए आपका शुक्रगुजार हूँ.

    उत्तर देंहटाएं