शनिवार, 22 जनवरी 2011

!! मुक्तिका !!

!! मुक्तिका !!

1 टिप्पणी:

  1. तारीफ़ वो किसी की करेंगे भी तो कैसे
    अहम में अपने ही जो लबालब भरे हैं...सुंदर पंक्तियाँ,पूरी मुक्तिका ही सच्ची और सामयिक है जो आज के हालात का वास्तविक दर्पण है.

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