रविवार, 15 अप्रैल 2012

!!! देशप्रेम या.... !!!


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!!! देशप्रेम या.... !!!
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........अपने देश के लिए हर देश प्रेमी यही सोचता है कि मैं इसके लिए क्या कर सकता हूँ.वह अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने देश को हमेशा कुछ ना कुछ देनें को तत्पर रहता ही है,और यही देश प्रेम की निशानी भी है.
........लेकिन आश्चर्य कि,इससे इतर भी कुछ लोग होते हैं,जो बातें तो अक्सर ऐसी करते हैं कि जैसे उनके जैसा बड़ा देश प्रेमी आज तक हिन्दुस्तान में कोई पैदा ही नहीं हुआ,लेकिन वे अक्सर सच्चे देश प्रेमियों की टांग खीचने का ही पराक्रम करते रहते हैं ! इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है ''अन्ना' और 'स्वामी रामदेव'' का आन्दोलन !
........इतिहास बताता है कि देश और देशहित के ऐसे आन्दोलन खड़े होने में दशकों बीत जाते हैं,और इतिहास में अपनी छाप छोड़ जाते हैं ! 'अन्ना' और 'रामदेव' का जन आन्दोलन भी ऐसा ही एक आन्दोलन माना गया. एक तरफ इन जन आन्दोलनों में हिन्दुस्थान का एक आम इंसान अपनी भागीदारी निभाने को उतावला था,तो दूसरी तरफ कुछ 'पराक्रमी' इन जन आंदोलनों की हवा निकालने में ही जी जान से जुटे हुए थे ! इन 'पराक्रमियों' को 'अन्ना' और 'रामदेव' की टीम में तो हज़ारों खोट नज़र आ रही थी,किन्तु देश की छाती पर मूंग दलने वाले भ्रष्ट-बेईमानों की फौज में कोई खोट नज़र नहीं आ रही थी !
........अपनी-अपनी राजनैतिक विचारधाराओं (?) का मोटा चश्मा पहने बैठे भाई लोगों को यहाँ 'देशप्रेम' भी याद नहीं रहा ! क्या एक देश और उसके अवाम से भी बड़ी किसी राजनैतिक पार्टी की विचारधारा हो सकती है ? शायद कुछ लोगों के लिए अवश्य ही हो सकती है,क्योंकि उनके लिए 'सत्ता' और 'कुर्सी' ही देश से भी ऊपर होती है !
वरना क्या कारण है कि 'अन्ना',जो कि देश के सबसे निचले स्तर के इंसान की बेहतरी की बात करते हैं,देशहित की बात करते हैं,देश को भ्रष्टाचारियों-बेईमानों से बचाने की बात करते हैं,तब भी उनका विरोध किया जाता है ! उनकी टीम के कुछ सदस्यों पर आरोप लगा कर देशहित के एक पुरे जन आन्दोलन को ही फ़ैल करने का षडयंत्र रचा जाता है !!
......'रामदेव',जो कि निरंतर देशवासियों का स्वास्थ्य और व्यवस्था सुधार की बात कर रहे हैं,न केवल बात ही कर रहे हैं,बल्कि अपना कर्तव्य भी निभा रहे हैं,फिर भी उनका भी जम कर विरोध किया जा रहा है,यह कह कर कि वे तो अपनी दवाईयां बेच रहे हैं ! अरे भाई अगर वे अपनी दवाईयां बेच भी रहे हैं तो कम से कम,सरकार की तरह 'बहुराष्ट्रीय कम्पनियों' के साथ मिल कर देश के अवाम को 'लूट' तो नहीं रहे हैं ! कम मुनाफे पर देश के अवाम को दवाईयां उपलब्ध करवाना और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना भी कब से जुर्म हो गया ? आखिर ये कौनसी विचारधारा है,जो देश हित में काम करने वालों का विरोध करना सिखाती है? 
........'अन्ना' और 'स्वामी रामदेव' के जन आंदोलनों का विरोध कहीं मात्र इस लिए तो नहीं किया जा रहा,क्योंकि इन जन आंदोलनों से सीधे-सीधे सफ़ेदपोश'भ्रष्टाचारियों'-'बेईमानों' पर करारी चोट हो रही थी ओर उनका 'धंधा'ख़तरे में पड़ रहा था !
........भ्रष्टाचारियों और बेईमानो की तरफ़दारी करने वाले क्या ये बात जानते हैं कि उन्हें प्रतिफल के रूप में इसका क्षणिक लाभ तो मिल सकता है,लेकिन इससे वे देश और देशवासियों का जो नुकसान कर रहे हैं वह उनके देशप्रेम की भावना पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा सकता है !
........देशहित और देशहित का काम करने वालों का विरोध करके हम अपना 'देश प्रेम' प्रदर्शित कर रहे हैं,या......... कुछ और?
........और सबसे महत्वपूर्ण बात,क्या ऐसे लोगों के पास आज 'अन्ना' या, 'स्वामी रामदेव' से बेहतर कोई विकल्प मौज़ूद है ? अगर है,तो वे सामने लायें -- अवाम 'अन्ना' और 'रामदेव' को छोड़ कर उनके पास ख़ुशी-ख़ुशी चली जायेगी......! और अगर नहीं है,तो कृपया अपने पूर्वाग्रहों और नकारात्मक चिंतन की पोटली को,पत्थर बाँध कर किसी अंधेरे-गहरे कुएँ में फेंक दें,और अपनी विचारधारा को सकारात्मक दिशा में मोड़ें,ताकि देश और देशवासियों की दुर्दशा को दूर करने के प्रयास सफल हो सके.अन्यथा आने वाला समय तो हिसाब अवश्य ही मांगेगा ही कि जब देश भ्रष्टाचारियों-बेईमानों के चंगुल में फंसा था तब आप कौनसी शक्तियों के साथ खड़े थे ???
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1 टिप्पणी:

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