गुरुवार, 17 मई 2012

??? कब जागेगा देश ???


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.......शहरों में पनपा 'सिंथेटिक दूध' अब गाँवों-कस्बों में भी धड़ल्ले से बिक रहा है !निगरानी रखने वाला विभाग जानते-बूझते हुए भी निष्क्रिय है !सुबह का पहला घूंट 'ज़हर'के रूप में लोगों के शरीर में पहुँच रहा है,और बच्चे 'दूध' के रूप में बीमारियाँ गटक कर 'बीमार भविष्य' की और धकेले जा रहे हैं.
.......लालच के धंधे ने इंसान को मौत का सौदागर बना दिया है.ये सारा सच किसी से भी छुपा नहीं है...,लेकिन सभी तमाशा देखने में शामिल है.जिम्मेदार लोग एकाध बार,दिखावे के लिए एकाध 'दूधिये' पर छापामारी करते हैं.....उसका दूध गिरा देते हैं....और दुसरे दिन से 'दुधिया' फिर अपने 'सुकर्मों'में लग जाता है.....'जिम्मेदार' लोगों की जेबे गर्म होती रहती है......लोगों के शरीर में ज़हर घुलता रहता है.....!! 
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.......गर्मी का मौसम शुरू हो गया है.....!
.......गाँवों-कस्बों तक में 'मेंगोशेक' के ठेले कुकुरमुत्तों की तरह उग आये है...!
.......पांच-दस रुपये में एक आम या गिलास भर दूध मिलना भी मुश्किल है,और ये ठेले वाले पूरा गिलास भर 'मेंगोशेक' इतने रुपये में ही बेच रहे हैं !
.......'शुद्ध के लिए युद्ध' की रणभेरी बजाने वाले सरकारी खाद्ध्य विभाग के 'रणबांकुरे' ना जाने कहाँ मुफ्त का 'मेंगोशेक' पी कर लम्बी तान कर सो रहे हैं !! लगता है इन रणबांकुरों की आत्मा को 'मेंगोशेक' से ठंडा,और जेब को 'गरम' कर दिया गया है !!
.......खतरनाक रासायनिक पदार्थोयुक्त इस ''मेंगोशेक' की असलियत पहले भी कईं बार खुल चुकी है,लेकिन ये भारत है.....यहाँ किसी के भी 'पेट' पर लात मारना 'पाप' है,चाहे वो ओरों के 'पेट' और 'जिंदगी' के साथ खिलवाड़ ही क्यूँ नहीं कर रहा हो !!!
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.......झोलाछाप डाक्टरों का जाल गाँवों-कसबों से लेकर शहरों तक फैला हुआ है !स्वस्थ हो कर जीने की आस लिए इन झोलाछाप डाक्टरों के पास आने वाला यहाँ 'सस्ते' में 'मौत' पा रहा है !'प्लस' का निशाँ लगाए बैठे ये 'झोलाछाप डाक्टर' नादाँ लोगों की जान की कीमत पर 'नोट कूटने' में लगे हुए हैं ! सरकारी स्वास्थ विभाग सभी जगह 'नींद की गोलिया' गटक कर सो रहा है ! उसे इंतज़ार है किसी नादाँ इंसान के मरने का,ताकि तब शायद शिकायत आये और उसे मज़बूरी में कोई कार्यवाही करनी पड़े !
.......मौत के इस कारोबार में जिम्मेदार लोगों को भी भरपूर 'टोनिक' मिल रहा है.....किसी की जान की कीमत पर....!! सरकार ने तनख्वा-भत्ते देने और सालो साल बढाते जाने की निति बना दी,'जिम्मेदार' किसी को भी नहीं बनाया....मिलबांट कर 'मलाई' खा-खा कर सब 'जिम्मेदार' लोग मुटिया रहे हैं और हिन्दुस्तान के आम इंसान की जान पर बन आई है......!!
??? कब जागेगा देश ???
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2 टिप्‍पणियां:

  1. डाक्टर साहब,
    सहमत हूँ आपकी बात से.....और पीड़ा यही है कि 'चोर' अपना काम कर जाता रहता है और 'मालिक' खुली आँखों से देखता रहता है !ये सूरत बदलनी चाहिए !!

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