शुक्रवार, 18 मई 2012

!!अगले जनम मोहे 'काम वाली बाई' ही कीजो!!

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.......जी नहीं.....अपुन का मगज खराब नहीं हुआ है....!न ही अपुन का भेजा फिरा है!!और ठर्रा तो अपुन पीता ही नहीं,इस लिए बहकी-बहकी बात करने का भी सवाल ही नहीं!!!ये महान ख्याल अपुन के दिल में ऐसे ही नहीं आ गया.अगर ऐसे ही आ जाता तो आप ला के दिखाईये....आया क्या ? नहीं ना! 
.......अजी लोगों के दिल में टाटा,अम्बानी,बिल गेट्स, मार्क जुकरबर्ग....या  ऐसा ही कोई बड़ा आदमी बनने का ख्याल आता है,लेकिन अपुन को तो अगले जनम में काम वाली बाई ही बनना है!
.......अब अगर घर में बीबी का प्यार नहीं मिले,तो क्या  टाटा,अम्बानी,बिल गेट्स, मार्क जुकरबर्ग....   और क्या कोई और!बीबी की मुहब्बत पति के हर ज़ख्म पर मरहम लगा देती है,और बीबी से लतियाया हुआ पति इस लोक और पर लोक,कहीं पर भी चैन नहीं पाता है!
.......दूसरों की क्या कहूँ.... अपनी खुद  की कहूंगा तो आपको भी अपने आप ही की लगने लगेगी! 
.......आज-कल पत्नियों को संतोष कहाँ ! 
.......'पास वाले शर्मा जी इतना कमा रहे हैं'.....और 'दूर वाले वर्मा जी भी नोट छाप रहे हैं'! 'एक तुम हो कि वहीँ के वहीँ अटके हुए हो ! शादी के बाद नाक का एक लोंग दिला दिया होता हो पछतावा नहीं होता.....मुझे साडी ला के दी कभी, याद आता  है क्या.....? गुप्ता जी तो हर साल ऊंटी-मसूरी घूमने ले जाते हैं 'मिसेज गुप्ता' को,मुझे पास के महादेव  जी के मंदिर  के और कही ले गए क्या....!
.......दफ्तर से कभी जल्दी घर आ जाओ तो शब्जी काटने से लेकर छोटे-मोटे बर्तन धोने तक का काम अपुन के ही जिम्मे आ जाता है ! वैसे भी 'सन्डे' को अपना आधा दिन साफ़-सफाई,कपड़े धोने,चाय बनाने,खाना बनाने में 'हेल्प' करने में जाता है,क्योंकि 'बीबी' की नज़र में एक वो ही तो दिन है जब कि वो 'रेस्ट' कर सकती है ! कहने का मतलब एक पति के लिए,पत्नी द्वारा  लतियाए जाने के तमाम कारण घर में हर समय मोजूद है ! ऐसे में बस इच्छा होती है कि प्रभु मुझे तो अगले जनम में 'काम वालो बाई' ही बनाए ! क्यों कि काम वाली बाई पर श्रीमतीजी का उमड़ता हुआ प्यार देख कर अपने पति होने पर बेहद अफ़सोस होता है ! 
.......मैं ऑफिस से घंटों देरी से आऊं तो भी मेरे हाल-चाल जानने  के लिए एक भी फोन नहीं करने वाली बीबी,काम वाली बाई के दस मिनिट लेट हो जाने पर बीस फोन कर देती है ! मेरे एक कप  चाय मांगने पर चिल्ल -पों मचा देने वाली बीबी काम वाली बाई के घर में प्रवेश करते ही चाय और बिस्कुट से स्वागत करती है ! जब तक काम वाली बाई घर में काम करती रहती हैं,मुझसे भोंहें चढ़ा कर बात करने वाली बीबी के मुंह से मधुर भाषा के झरने फूटते रहते हैं.....! काम वाली बाई के पुरे खानदान के हालचाल जानने के साथ साथ तमाम तरह की मिन्नतों का भी दौर अनवरत चालु रहता है ! पत्नी द्वारा बोले गए 'ध्यान से जाना और कल जल्दी आ जाना' जैसे जुमलों से कामवाली बाई मालामाल होती रहती है,और पति नाम के निरीह प्राणी की  बेचारगी मेरे सामने आ कर खड़ी हो जाती है ! 
.......अब ऐसे में आप सोचो कि क्या 'कामवाली बाई' हो जाना ज्यादा अच्छा या कि एक 'बेचारा' पति! अपुन तो उपरवाले को अगले जनम में अपुन को 'काम वाली बाई' बनाने का ही 'अप्लिकेशन' दे चुका है.....आपका क्या ख्याल है ?!!
चेतावनी :यह आलेख सच्ची घटनाओं को झूठ मान कर प्रस्तुत किया गया है!
अधिकाँश 'पति' पाठकों को इस आलेख में अपनी आपबीती नज़र आ सकती है.....यह महज़ एक संयोग नहीं है...!!इसके लिए लेखक किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है !!!
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6 टिप्‍पणियां:

  1. दर्द कुछ अपुन जैसा ही है

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    1. वर्मा साहब,'अपनों' का दर्द ही साझा किया है मैंने !:))

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  2. हा हा हा बहुत खूब। शुभकक़मनायें\

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  3. aapki khubsurat kalpana ne chehre ko colgate wali muskan dedi hai ..kya baat ....kay baat...

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  4. अर्चना जी,ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
    आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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