शनिवार, 26 मई 2012

!! इ खून बहुत महँगा है रे बाबा !!

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......देश में भूख,गरीबी,भ्रष्टाचार और नेताओं की 'मारक' नीतियों से आम इंसानों का खून बहते देख मुझे लगा था कि अब इंसानों के खून की कीमत कुछ भी नहीं है ! किन्तु अपने खून के  प्रति एक स्वनाम धन्य नेता जी का प्रेम देख कर मुझे पुनः लगने लगा है कि खून की कीमत ज़रूर है....बल्कि बहुत ही ज्यादा है,इसी लिए ये 'वरिष्ठ' नेता जी 'दो-चार' बूंद 'खून' की देने के लिए भी तैयार नहीं है ! अब तो हालत ये है कि कोर्ट-कचहरी को कहना पड रहा है कि इन नेताजी के घर जा कर उनका 'अमूल्य' खून लाया जाए!
......एक समय था जब कि आदरणीय 'सुभाष चन्द्र बोस' जैसे इस देश के महान सपूत नारा ही ये दिया करते थे कि ''तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" आज भी कईं नेता इस देश के लिए जोर-शोर से अपना खून तक दे देने की डींगे हांकते रहते हैं,लेकिन जब वास्तव में 'खून' देने का समय आता है तो मुकर जाते है ! अब इन 'वरिष्ठ नेता जी' को ही देख लीजिये,कौनसा उनके खून को निचोड़ डालने की बात थी....देना तो कुछ बूंद भर है,लेकिन फिर भी 'नानी' याद आ रही हैं ! ये आखिर कैसा खून हैं ? इस खून की इतनी कीमत कि दो-चार बूंद के लिए कोर्ट-कचहरी-पुलिस.....तक को बीच में आना पड़ रहा है,जबकि इस देश का आम इंसान भ्रष्टाचार के महारथियों के समूह द्वारा पूरा का पूरा अंतिम बूंद तक निचोड़ा जा रहा है.....और कोई भी कुछ नहीं बोल रहा ! इस से साबित होता है कि इन 'हट्टे कट्टे' पुराने 'घाघ नेताओं' के खून में ज़रूर तो कुछ ना कुछ 'विशेष' है,वरना दो-चार बूंद के लिए इतनी आनाकानी क्यूँ ? 
......बेशक वो खून भी लाल रंग का ही होगा,लेकिन फिर भी उस खून की तासीर कुछ तो अलग ही होगी ! हो सकता है कि उस खून ने दूसरों को 'आज़ादी' देने के बजाय  स्वयं 'नेताजी' को इतनी 'आज़ादी' दी हो कि वे 'आज़ादी' का 'मजा' खुले मन से लूट सके ! संभावनाएं अनंत है ! अब इस अनमोल खून का सच तो तभी सामने आयेगा जबकि नेताजी दो-चार बूंद खून देने को राजी हो जायेंगे. 
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6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    1. अर्चना जी आपके स्नेह और होसलाफ्जाई के लिए आपका शुक्रगुजार हूँ.

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  3. Baat do boond khoon se behad gambhir hai, mamla poori umar ki banai hui zaidad ke waris ka hai

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    1. मलिक साहब,बिलकुल सही फरमाया आपने....'खून' की इन 'चंद बूंदों' में सामाजिक और राजनैतिक विरासत को नेस्तानाबूद करने की पूरी ताकत है....!
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

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